आज का दिन यादों के झरोखों से शायद इस लेख को पढ़ने वालों में से बहुत से लोगों के पिता जी भारतीय वायु सेना में कार्यरत रहे होंगे, तो उनके लिए खुद को इस लेख से जोड़ पाना आसान रहेगा। इस लेख के द्वारा मैं आप लोगों को अपनी कुछ ऐसी सुखद यादों के गलियारों में ले जाना चाहती हूँ जिन्हे मैंने जिया है। तो आज का दिन उन दिनों को याद करने का है और इस बात पर विचार करने का है कि हमारी पीढ़ी वैसे दिनों को क्यों सहेज कर नहीं रख पायी ? भारतीय सेना की सबसे प्रमुख बात है कि उसमें सभी लोग धर्म, जाति, वर्ण, राज्य आदि की विभिन्नताओं से परे होते हैं। इस बात को मैंने बहुत करीब से देखा है। बात आज से लगभग २५ से ३० साल पहले की है जब मेरे पिताजी वायु सेना में काम करते थे और हम किसी वायु सेना के कैंप में रहा करते थे। उन जगहों पर साल के सभी पर्व बहुत ही मज़ेदार होते थे। यूँ समझ लीजिये कि त्यौहार भले ही किसी एक राज्य में मनाया जाने वाला हो पर वहां पर सभी लोग इन त्योहारों को मिलकर मानते थे। मार्च में जब होली मनाई जाती थी तो सभी धर्म के लोग एक न...
वर्षों तक शिक्षण से जुड़े रहने के कारण ज्ञान प्राप्त करना और उसका संचार करना मेरा प्रमुख कार्य रहा है। इसी के तहत, मुझे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास भी है। इस ब्लॉग का मूल ध्येय आज की पीढ़ी में, समाज और वातावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना, और उन्हें यह एहसास दिलाना है कि उनके द्वारा आज उठाए गए कदम इस पृथ्वी का आने वाला कल निर्धारित करेंगे। इसके अलावा इस बात की पुष्टि करना भी आवश्यक है कि वे इस पृथ्वी और समाज के कल्याण के लिए सही दिशा चुनेंगे जिसमें सबका हित अंतर्निहित होगा।