पेड़- पौधों की दुनिया गुलमोहर Photo credit: Tejasdeep Mohanta इस साल, लॉक डाउन की वजह से,अपने आस-पास के नैसर्गिक सौंदर्य को देखने का जो अवसर मिला है ये शायद उसी का परिणाम है कि बचपन की बहुत सारी यादें ताज़ा हो गई हैं। ऐसी ही यादों से जुड़ा एक गाना अनायास ही दिमाग में चलने लगता है जब भी मैं अपने घर की बालकनी से दिखने वाले बगीचे में लगे फूलों से भरे एक विशेष पेड़ को देखती हूँ। वो गाना है, ' गुलमोहार गर तुम्हारा नाम होता ,मौसम -ए -गुल को हँसाना भी हमारा काम होता.....' हम सभी ने, जो उम्र के तीस-चालिस दशक पार कर चुके हैं, बचपन में ये गाना ज़रूर सुना या गुनगुनाया होगा। आज का ये लेख इसी गाने से प्रेरित है। इस गाने की वजह से ही मेरी पहचान इस वृक्ष से हुई थी। आजकल के बच्चों के साथ, दो दशकों तक, बहुत करीब से समय बिताने के बाद मैंने पाया कि जिस तरह हमारे परिवार के सदस्यों ने और हमारे समाज ने हमें बचपन में हमारी प्रकृति से पहचान करवाई थी वैसा हम अपने बच्चों के साथ नहीं कर पाए हैं।आजकल के बच...
वर्षों तक शिक्षण से जुड़े रहने के कारण ज्ञान प्राप्त करना और उसका संचार करना मेरा प्रमुख कार्य रहा है। इसी के तहत, मुझे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास भी है। इस ब्लॉग का मूल ध्येय आज की पीढ़ी में, समाज और वातावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना, और उन्हें यह एहसास दिलाना है कि उनके द्वारा आज उठाए गए कदम इस पृथ्वी का आने वाला कल निर्धारित करेंगे। इसके अलावा इस बात की पुष्टि करना भी आवश्यक है कि वे इस पृथ्वी और समाज के कल्याण के लिए सही दिशा चुनेंगे जिसमें सबका हित अंतर्निहित होगा।